बुलाती है मगर जाने का नईं - Bulati hai Mgar Jaane ka nai- Dr. Rahat Indauri डॉ राहत इन्दौरी

बुलाती है मगर जाने का नईं  ये दुनिया है इधर जाने का नईं   मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर मगर हद से गुजर जाने का नईं   सितारें नोच कर ले जाऊँगा मैं खाली हाथ घर जाने का नईं   वबा फैली हुई है हर तरफ अभी माहौल मर जाने का नईं   वो गर्दन नापता है नाप ले मगर जालिम से डर जाने का नईं 

Dr. Rahat Indauri 

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