जीवन जहाँ खत्म हो जाता - jeevan jahaan khatm ho jaata - Gopaldas "Neeraj" - गोपालदास "नीरज"

जीवन जहाँ खत्म हो जाता !
उठते-गिरते,
जीवन-पथ पर
चलते-चलते,
पथिक पहुँच कर,
इस जीवन के चौराहे पर,
क्षणभर रुक कर,
सूनी दृष्टि डाल सम्मुख जब पीछे अपने नयन घुमाता !
जीवन वहाँ ख़त्म हो जाता !

Gopaldas "Neeraj" - गोपालदास "नीरज"

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