मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ - mom ke paas kabhee aag ko laakar dekhoon: Dr. Rahat Indauri डॉ० राहत इन्दौरी
मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूँ कभी चुपके से चला आऊँ तेरी खिलवत में और तुझे तेरी निगाहों से बचा कर देखूँ मैने देखा है ज़माने को शराबें पी कर दम निकल जाये अगर होश में आकर देखूँ दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र आता है सोचता हूँ तेरी तस्वीर लगा कर देखूँ तेरे बारे में सुना ये है के तू सूरज है मैं ज़रा देर तेरे साये में आ कर देखूँ याद आता है के पहले भी कई बार यूं ही मैने सोचा था के मैं तुझको भुला कर देखूँ
डॉ० राहत इन्दौरी
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