ये ज़िन्दगी सवाल थी जवाब माँगने लगे - ye zindagee savaal thee javaab maangane lage - Dr. Rahat “ Indauri” - डॉ० राहत “इन्दौरी”
ये ज़िन्दगी सवाल थी जवाब माँगने लगे
फरिश्ते आ के ख़्वाब मेँ हिसाब माँगने लगे
इधर किया करम किसी पे और इधर जता दिया
नमाज़ पढ़के आए और शराब माँगने लगे
सुख़नवरों ने ख़ुद बना दिया सुख़न को एक मज़ाक
ज़रा-सी दाद क्या मिली ख़िताब माँगने लगे
दिखाई जाने क्या दिया है जुगनुओं को ख़्वाब मेँ
खुली है जबसे आँख आफताब माँगने लगे
Dr. Rahat “ Indauri” - डॉ० राहत “इन्दौरी”
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