जब भी किसी ने ख़ुद को सदा दी - jab bhee kisee ne khud ko sada dee - - निदा फ़ाज़ली - Nida Fazli
जब भी किसी ने ख़ुद को सदा दी
सन्नाटों में आग लगा दी
मिट्टी उस की पानी उस का
जैसी चाही शक्ल बना दी
छोटा लगता था अफ़साना
मैं ने तेरी बात बढ़ा दी
जब भी सोचा उस का चेहरा
अपनी ही तस्वीर बना दी
तुझ को तुझ में ढूँड के हम ने
दुनिया तेरी शान बढ़ा दी
- निदा फ़ाज़ली - Nida Fazli
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