जब किसी से कोई गिला रखना - jab kisee se koee gila rakhana - - निदा फ़ाज़ली - Nida Fazli
जब किसी से कोई गिला रखना
सामने अपने आईना रखना
यूँ उजालों से वास्ता रखना
शम्मा के पास ही हवा रखना
घर की तामीर[1] चाहे जैसी हो
इस में रोने की जगह रखना
मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिये
अपने घर में कहीं ख़ुदा रखना
मिलना जुलना जहाँ ज़रूरी हो
मिलने-जुलने का हौसला रखना
- निदा फ़ाज़ली - Nida Fazli
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