ज़िन्दगी और ज़माने की - zindagee aur zamaane kee - - हरिवंशराय बच्चन - harivansharaay bachchan

ज़िन्दगी और ज़माने की
कशमकश से घबराकर
मेरे बेटे मुझसे पूछते हैं कि
हमें पैदा क्यों किया था?
और मेरे पास इसके सिवाय
कोई जवाब नहीं है कि
मेरे बाप ने मुझसे बिना पूछे
मुझे क्यों पैदा किया था?

और मेरे बाप को उनके
बाप ने बिना पूछे उन्हें और
उनके बाबा को बिना पूछे उनके
बाप ने उन्हें क्यों पैदा किया था?

ज़िन्दगी और ज़माने की
कशमकश पहले भी थी,
आज भी है शायद ज्यादा…
कल भी होगी, शायद और ज्यादा…

तुम ही नई लीक रखना,
अपने बेटों से पूछकर
उन्हें पैदा करना।

- हरिवंशराय बच्चन - harivansharaay bachchan

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