छू लेने दो नाज़ुक होठों को - chhoo lene do naazuk hothon ko - -साहिर लुधियानवी - saahir ludhiyaanavee

छू लेने दो नाज़ुक होठों को
कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये
क़ुदरत ने जो हमको बख़्शा है
वो सबसे हँसीं ईनाम हैं ये

शरमा के न यूँ ही खो देना
रंगीन जवानी की घड़ियाँ
बेताब धड़कते सीनों का
अरमान भरा पैगाम है ये, छू लेने दो ...

अच्छों को बुरा साबित करना
दुनिया की पुरानी आदत है
इस मय को मुबारक चीज़ समझ
माना की बहुत बदनाम है ये, छू लेने दो ...

-साहिर लुधियानवी - saahir ludhiyaanavee

Comments