काली काली आँखों का- kaalee kaalee aankhon ka- गुलज़ार – gulazaar –Poem Gazal Shayari
काली काली आँखों का
काला काला जादू है
आधा आधा तुझ बिन मैं
आधी आधी सी तू है
काली काली आँखों का
काला काला जादू है
आज भी जुनूनी सी
जो एक आरज़ू है
यूँ ही तरसने दे
यह आँखें बरसने दे
तेरी आँखें दो आँखें
कभी शबनम कभी खुशबू है
काली काली आँखों का
काला काला जादू है
आधा आधा तुझ बिन मैं
आधी आधी सी तू है
[काली काली आँखों काला काला जादू]
गहरे समंदर और दो जज़ीरे
डूबे हुए हैं कितने ज़खीरे
ढूँढने दो अश्कों के मोती
सीपी से खोलो
पलकों से झांके तो झाँकने दो
कतरा कतरा गिनने दो
कतरा कतरा चुनने दो
कतरा कतरा रखना है ना
कतरा कतरा रखने दो
तेरी आँखों का यह साया
अँधेरे में कोई जुगनू है
काली काली आँखों का
काला काला जादू है
आधा आधा तुझ बिन मैं
आधी आधी सी तू है
जाने कहाँ पे बदलेंगे दोनों
उड़ते हुए यह शब के परिंदे
पलकों पे बैठा ले के उड़े हैं
दो बूँद दे दो प्यासे पड़े हैं
हाँ दो बूँदें
लम्हा लम्हा लम्हे दो
लम्हा लम्हा जीने दो
कह भी दो ना आँखों से
लम्हा लम्हा पीने दो
तेरी आँखें हल्का सा
छलका सा एक आंसू है
काली काली आँखों का
काला काला जादू है
आधा आधा तुझ बिन मैं
आधी आधी सी तू है
काली काली आँखों का
काला काला जादू है
- गुलज़ार - gulazaar
#guljar
#gazar
#Gazal,
#poem,
#kavita,
#shayari,
#poem gazal shayari
Comments
Post a Comment