बोलिये सुरीली बोलियाँ - boliye sureelee boliyaan - गुलजार - Gulzar -Poem Gazal Shayari
बोलिये सुरीली बोलियाँ
खट्टी मीठी आँखों की रसीली बोलियाँ
रात में घोले चाँद की मिश्री
दिन के ग़म नमकीन लगते हैं
नमकीन आँखों की नशिली बोलियाँ
गूंज रहे हैं डूबते साये
शाम की खुशबू हाथ ना आये
गूंजती आँखों की नशिली बोलियाँ
गुलजार - Gulzar
-Poem Gazal Shayari
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