खड़खड़ाता हुआ निकला है उफ़क से सूरज - khadakhadaata hua nikala hai ufak se sooraj - गुलजार - Gulzar -Poem Gazal Shayari

खड़खड़ाता हुआ निकला है उफ़क से सूरज

जैसे कीचड़ में फँसा पहिया ढकेला किसी ने

चब्बे-टब्बे-से किनारों पर नज़र आते हैं

रोज़-सा गोल नहीं

उधड़े-उधड़े-से उजाले हैं बदन पर

और चेहरे पर खरोंचे के निशान हैं

गुलजार - Gulzar

-Poem Gazal Shayari

Comments

Popular posts from this blog

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

गैस की कमी में खाना बनाने के 20+ स्मार्ट तरीके | Complete Guide for Smart Cooking Article Ambika Rahee

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) – पूरा प्रोसेस, ट्रेनिंग, टूल्स और फायदे