मार दी तुझे पिचकारी - maar dee tujhe pichakaaree - - सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" - Suryakant Tripathi "Nirala" - Poem_Gazal_Shayari

मार दी तुझे पिचकारी,
कौन री, रँगी छबि यारी ?

   फूल -सी देह,-द्युति सारी,
   हल्की तूल-सी सँवारी,
   रेणुओं-मली सुकुमारी,
   कौन री, रँगी छबि वारी ?

मुसका दी, आभा ला दी,
उर-उर में गूँज उठा दी,
   फिर रही लाज की मारी,
   मौन री रँगी छबि प्यारी।


- सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला" - Suryakant Tripathi "Nirala"

- Poem_Gazal_Shayari

Comments