रात कल गहरी नींद में थी जब - raat kal gaharee neend mein thee jab - गुलजार - Gulzar -Poem Gazal Shayari

रात कल गहरी नींद में थी जब

एक ताज़ा-सफ़ेद कैनवस पर

आतिशीं, लाल -सुर्ख रंगों से

मैं ने रौशन किया था इक सूरज-

सुबह तक जल गया था वह कैनवस

राख बिखरी हुई थी कमरे में

गुलजार - Gulzar

-Poem Gazal Shayari

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