शाम से आँख में नमी सी है - shaam se aankh mein namee see hai - गुलजार - Gulzar -Poem Gazal Shayari

शाम से आँख में नमी सी है
आज फिर आप की कमी सी है

दफ़्न कर दो हमें कि साँस मिले
नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है

वक़्त रहता नहीं कहीं थमकर
इस की आदत भी आदमी सी है

कोई रिश्ता नहीं रहा फिर भी
एक तस्लीम लाज़मी सी है



गुलजार - Gulzar

-Poem Gazal Shayari

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