चाँदनी चुपचाप सारी रात- chaandanee chupachaap saaree raat-sachchidanand hiranand vatsyayan "agay"- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय" #Poem Gazal Shayari #Poem_Gazal_Shayari

चाँदनी चुपचाप सारी रात-
सूने आँगन में
जाल रचती रही ।

मेरी रूपहीन अभिलाषा
अधूरेपन की मद्धिम-
आँच पर तचती रही ।

व्यथा मेरी अनकही
आनन्द की सम्भावना के
मनश्चित्रों से परचती रही ।

मैं दम साधे रहा
मन में अलक्षित
आँधी मचती रही ।

प्रात बस इतना कि मेरी बात
सारी रात
उघड़ कर वासना का
रूप लेने से बचती रही ।


sachchidanand hiranand vatsyayan "agay"- सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय"

#Poem Gazal Shayari

#Poem_Gazal_Shayari

Comments

Popular posts from this blog

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

गैस की कमी में खाना बनाने के 20+ स्मार्ट तरीके | Complete Guide for Smart Cooking Article Ambika Rahee

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) – पूरा प्रोसेस, ट्रेनिंग, टूल्स और फायदे