गाँधी तो हमारा भोला है, और शेख़ ने बदला चोला है - gaandhee to hamaara bhola hai, aur shekh ne badala chola hai -अकबर "इलाहाबादी" - Akbar "Allahabadi" Poem Gazal Shayari

गाँधी तो हमारा भोला है, और शेख़ ने बदला चोला है
देखो तो ख़ुदा क्या करता है, साहब ने भी दफ़्तर खोला है

आनर की पहेली बूझी है, हर इक को तअल्ली सूझी है
जो चोकर था वह सूजी है, जो माशा था वह तोला है

यारों में रक़म अब कटती है, इस वक़्त हुकूमत बटती है
कम्पू से तो ज़ुल्मत हटती है, बे-नूर मोहल्ला-टोला है

अकबर "इलाहाबादी" - Akbar "Allahabadi"

Poem Gazal Shayari

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