जो हस्रते दिल है, वह निकलने की नहीं - jo hasrate dil hai, vah nikalane kee nahin -अकबर "इलाहाबादी" - Akbar "Allahabadi" Poem Gazal Shayari


जो हस्रते दिल है, वह निकलने की नहीं
जो बात है काम की, वह चलने की नहीं

यह भी है बहुत कि दिल सँभाले रहिए
क़ौमी हालत यहाँ सँभलने की नहीं

अकबर "इलाहाबादी" - Akbar "Allahabadi"

Poem Gazal Shayari

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