ख़ैर उनको कुछ न आए फाँस लेने के सिवा - khair unako kuchh na aae phaans lene ke siva -अकबर "इलाहाबादी" - Akbar "Allahabadi" Poem Gazal Shayari


ख़ैर उनको कुछ न आए फाँस लेने के सिवा
मुझको अब करना ही क्या है साँस लेने के सिवा

थी शबे-तारीक, चोर आए, जो कुछ था ले गए
कर ही क्या सकता था बन्दा खाँस लेने के सिवा

अकबर "इलाहाबादी" - Akbar "Allahabadi"

Poem Gazal Shayari

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