रोमांचित हो उठे आज नव वर्षा के स्पर्शों से - romaanchit ho uthe aaj nav varsha ke sparshon se -Sumitra Nandan Pant - सुमित्रानंदन पंत #Poem Gazal Shayari

रोमांचित हो उठे आज नव वर्षा के स्पर्शों से?
छोटे से आँगन मेरे, तुम रीते थे वर्षों से!
नव दूर्वा के हरे प्ररोहों से अब भरे मनोहर
मरकत के टुकड़े से लगते तुम विजड़ित भू उर पर!

जन निवास से दूर, नीड़ में वन तरुओं के छिपकर,
भू उरोज-से उभरे इस एकांत मौन भीटे पर
कोमल शाद्वल अंचल पर लेटा मैं स्मित चिन्तापर,
जीवन की हँसमुख हरीतिमा को देखूँ आँखें भर!

एक ओर गहरी खाई में सोया तरुओं का तम
केका रव से चकित, बखेरे सुख स्वप्नों का संभ्रम!
और दूसरी ओर मंजरित आम्र विपिन कर मुखरित
मधु में पिक, पावस में पी-खग करे हृदय को हर्षित!

हरित भरित वन नीम उच्छ्वसित शाखाओं पर विह्वल
वक्षभार, हाँ, रहे झुकाए मेरे ऊपर कोमल!



Sumitra Nandan Pant - सुमित्रानंदन पंत 

#Poem Gazal Shayari

#Poem_Gazal_Shayari

Comments

Popular posts from this blog

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

गैस की कमी में खाना बनाने के 20+ स्मार्ट तरीके | Complete Guide for Smart Cooking Article Ambika Rahee

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) – पूरा प्रोसेस, ट्रेनिंग, टूल्स और फायदे