उड़ती है धूल, कहती : "थे आए - udatee hai dhool, kahatee : "the aae -रवीन्द्रनाथ टैगोर - Rabindranath tagore, #poemgazalshayari.in




उड़ती है धूल, कहती : "थे आए,
चैतरात,लौट गए, बिना कुछ बताए ।"
आए फिर, लगा यही, बैठा एकाकी ।
वन-वन में तैर रही तेरी ही झाँकी ।।
नए-नए किसलय ये, लिए लय पुरानी,
इसमें तेरी सुगंध, पैठी, समानी ।।
उभरे तेरे आखर, पड़े तुम दिखाई ।
हाँ,हाँ, वह उभरी थी तेरी परछाईं ।।
डोला माधवी-कुंज,तड़पन के साथ ।
लगा यही छू लेगा, तुम्हें बढ़ा हाथ ।।


रवीन्द्रनाथ ठाकुर - Rabindranath Thakur,
रवीन्द्रनाथ टैगोर - Rabindranath tagore,

#poemgazalshayari.in

Comments

Popular posts from this blog

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

गैस की कमी में खाना बनाने के 20+ स्मार्ट तरीके | Complete Guide for Smart Cooking Article Ambika Rahee

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) – पूरा प्रोसेस, ट्रेनिंग, टूल्स और फायदे