आज-कल तमाम रात - aaj-kal tamaam raat --धर्मवीर भारती - Dharamvir Bharti #dharmveerbharti #धर्मवीर #poemgazalshayari.in

आज-कल तमाम रात
चांदनी जगाती है

मुँह पर दे-दे छींटे
अधखुले झरोखे से
अन्दर आ जाती है
दबे पाँव धोखे से

माथा छू
निंदिया उचटाती है
बाहर ले जाती है
घंटो बतियाती है

ठंडी-ठंडी छत पर
लिपट-लिपट जाती है
विह्वल मदमाती है
बावरिया बिना बात?

आजकल तमाम रात
चाँदनी जगाती है

-धर्मवीर भारती - Dharamvir Bharti

#dharmveerbharti #धर्मवीर
#poemgazalshayari.in

Comments

Popular posts from this blog

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

जीवन का उद्देश्य क्या है? | What is the Purpose of Life? सभी आचार्यों के मतों को विस्तार से समझे Article By Ambika Rahee

एक शुरुआत के लिए YouTube Channel Studio Setup Guide | Step-by-Step Article कई सालों का अनुभव