बरबाद मेरी ज़िन्दगी - barabaad meree zindagee - -धर्मवीर भारती - Dharamvir Bharti #dharmveerbharti #धर्मवीर #poemgazalshayari.in

बरबाद मेरी ज़िन्दगी
इन फिरोज़ी होठों पर

गुलाबी पाँखुरी पर हल्की सुरमई आभा
कि ज्यों करवट बदल लेती कभी बरसात की दुपहर
इन फिरोज़ी होठों पर

तुम्हारे स्पर्श की बादल-धुली कचनार नरमाई
तुम्हारे वक्ष की जादू भरी मदहोश गरमाई
तुम्हारी चितवनों में नर्गिसों की पाँत शरमाई
किसी की मोल पर मैं आज अपने को लुटा सकता
सिखाने को कहा
मुझसे प्रणय के देवताओं ने
तुम्हें आदिम गुनाहों का अजब-सा इन्द्रधनुषी स्वाद
मेरी ज़िन्दगी बरबाद !

अन्धेरी रात में खिलते हुए बेले-सरीखा मन
मृणालों की मुलायम बाँह ने सीखी नहीं उलझन
सुहागन लाज में लिपटा शरद की धूप जैसा तन
पँखुरियों पर भँवर-सा मन टूटता जाता
मुझे तो वासना का
विष हमेशा बन गया अमृत
बशर्ते वासना भी हो तुम्हारे रूप से आबाद
मेरी ज़िन्दगी बरबाद !

गुनाहों से कभी मैली पड़ी बेदाग तरुणाई —
सितारों की जलन से बादलों पर आँच कब आई
न चन्दा को कभी व्यापी अमा की घोस कजराई
बड़ा मासूम होता है गुनाहों का समर्पण भी
हमेशा आदमी
मजबूर होकर लौट आता है
जहाँ हर मुक्ति के, हर त्याग के, हर साधना के बाद
मेरी ज़िन्दगी बरबाद !

-धर्मवीर भारती - Dharamvir Bharti

#dharmveerbharti #धर्मवीर
#poemgazalshayari.in

Comments

Popular posts from this blog

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

गैस की कमी में खाना बनाने के 20+ स्मार्ट तरीके | Complete Guide for Smart Cooking Article Ambika Rahee

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) – पूरा प्रोसेस, ट्रेनिंग, टूल्स और फायदे