वह आ रही है - vah aa rahee hai -- उत्पल बैनर्जी - Utpal Banerjee #www.poemgazalshayari.in

वह आ रही है --

स्मृति में बज उठा है देह का बसन्त
हवा में काँप रहा है तिलककामोद
बाँसवन के पीछे खिला है
फ़ॉस्फ़ोरस लिपटा चाँद,

वह आ रही है।

आँगन में फैली है वनतुलसी की गन्ध
जल में डूबी वनस्पति सुगबुगा रही है
उसकी देह की कोजागरी में
सुन्दर हो उठी है पृथ्वी
गाल पर ठहरा आँसू सूखने लगा है
अन्धकार को चीरकर
जा रही हैं प्रार्थनाएँ ऊर्ध्व की ओर

वह आ रही है....

 - उत्पल बैनर्जी - Utpal Banerjee
#www.poemgazalshayari.in

Comments

Popular posts from this blog

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

गैस की कमी में खाना बनाने के 20+ स्मार्ट तरीके | Complete Guide for Smart Cooking Article Ambika Rahee

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) – पूरा प्रोसेस, ट्रेनिंग, टूल्स और फायदे