अरे-अरे, क्या करते जी - are-are, kya karate jee -- उषा यादव- Usha Yadav #www.poemgazalshayari.in ||Poem|Gazal|Shaayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

अरे-अरे, क्या करते जी,
खाने में नखरेबाजी?
सब्जी रोटी सरकाई
दाल भी तुमको न भाई,
छोड़ रहे मूली ताजी
यह कैसी नखरेबाजी?

बुरी बात मुँह बिचकाना
शुरू करो चावल खाना,
माँगो जल्दी से भाजी
बहुत हुई नखरेबाजी!
खाओ खुश होकर खिचड़ी
यह भी तो स्वादिष्ट बड़ी,
अरे दही से नाराजी
छोड़ो भी नखरेबाजी।
ठंडा शरबत पी करके
आइसक्रीम पर जी करके,
हारोगे जीती बाजी!
दुख देगी नखरेबाजी!

- उषा यादव- Usha Yadav

#www.poemgazalshayari.in

||Poem|Gazal|Shaayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

Comments

Popular posts from this blog

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

गैस की कमी में खाना बनाने के 20+ स्मार्ट तरीके | Complete Guide for Smart Cooking Article Ambika Rahee

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) – पूरा प्रोसेस, ट्रेनिंग, टूल्स और फायदे