फ़कत उड़ने का बहाना एक जंगल और - fakat udane ka bahaana ek jangal aur -- जयप्रकाश त्रिपाठी- Jayprakash Tripathi #www.poemgazalshayari.in ||Poem|Gazal|Shaayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

फ़कत उड़ने का बहाना एक जंगल और।
रह गया बाक़ी ठिकाना एक जंगल और।

दूर तक आकाश है चारों दिशाओं में,
दूर तक देखे ज़माना एक जंगल और।

पसलियों को कस लिया है एक अजगर ने,
मौत का मंज़र पुराना एक जंगल और।

लद गए दिन फड़फड़ाते पंख खुलने के,
रहा अपना आशियाना एक जंगल और।

वक़्त को पहचान पाना बहुत मुश्किल है,
वक़्त से पहले न जाना एक जंगल और।

खुली आँखों एक सपना सामने जो है,
ख़्वाहिशों में अब न आना एक जंगल और।

- जयप्रकाश त्रिपाठी- Jayprakash Tripathi

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