जौ पै जिय धरिहौ अवगुन ज़नके - jau pai jiy dharihau avagun zanake -तुलसीदास- Tulsidas #www.poemgazalshayari.in ||Poem|Gazal|Shayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

जौ पै जिय धरिहौ अवगुन ज़नके।
तौ क्यों कट सुकृत नखते मो पै, बिपुल बृदं अघ बनके॥१॥
कहिहैं कौन कलुष मेरे कृत, कर्म बचन अरु मनके।
हारिहैं अमित सेष सारद-स्त्रुति, गिनत एक इक छनके॥२॥
जो चित पड़्हे नाम महिमा निज, गुनगुन पावन पनके।
तौ तुलसीहिं तारिहौ बिप्र ज्यों, दसन तोरि जम-गनके॥३॥

 तुलसीदास- Tulsidas

#www.poemgazalshayari.in

||Poem|Gazal|Shayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

Comments

Popular posts from this blog

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

गैस की कमी में खाना बनाने के 20+ स्मार्ट तरीके | Complete Guide for Smart Cooking Article Ambika Rahee

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) – पूरा प्रोसेस, ट्रेनिंग, टूल्स और फायदे