मो सउ कोऊ न कहै समझाइ - mo sau kooo na kahai samajhai -- रैदास- Raidas #www.poemgazalshayari.in ||Poem|Gazal|Shayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

मो सउ कोऊ न कहै समझाइ।
जाते आवागवनु बिलाइ।। टेक।।
सतजुगि सतु तेता जगी दुआपरि पूजाचार।
तीनौ जुग तीनौ दिड़े कलि केवल नाम अधार।।१।।
पार कैसे पाइबो रे।।
बहु बिधि धरम निरूपीऐ करता दीसै सभ लोइ।
कवन करम ते छूटी ऐ जिह साधे सभ सिधि होई।।२।।
करम अकरम बीचारी ए संका सुनि बेद पुरान।
संसा सद हिरदै बसै कउनु हिरै अभिमानु।।३।।
बाहरु उदकि पखारीऐ घट भीतरि बिबिध बिकार।
सुध कवन पर होइबो सुव कुंजर बिधि बिउहार।।४।।
रवि प्रगास रजनी जथा गति जानत सभ संसार।
पारस मानो ताबो छुए कनक होत नहीं बार।।५।।
परम परस गुरु भेटीऐ पूरब लिखत लिलाट।
उनमन मन मन ही मिले छुटकत बजर कपाट।।६।।
भगत जुगति मति सति करी भ्रम बंधन काटि बिकार।
सोई बसि रसि मन मिले गुन निरगुन एक बिचार।।७।।
अनिक जतन निग्रह कीए टारी न टरै भ्रम फास।
प्रेम भगति नहीं उपजै ता ते रविदास उदास।।८।।

- रैदास- Raidas

#www.poemgazalshayari.in

||Poem|Gazal|Shayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

Comments

Popular posts from this blog

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

गैस की कमी में खाना बनाने के 20+ स्मार्ट तरीके | Complete Guide for Smart Cooking Article Ambika Rahee

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) – पूरा प्रोसेस, ट्रेनिंग, टूल्स और फायदे