राम बिनु तन को ताप न जाई raam binu tan ko taap na jaee - कबीर- Kabir #www.poemgazalshayari.in ||Poem|Gazal|Shayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

राम बिनु तन को ताप न जाई ।

जल में अगन रही अधिकाई ॥

राम बिनु तन को ताप न जाई ॥



तुम जलनिधि मैं जलकर मीना ।

जल में रहहि जलहि बिनु जीना ॥

राम बिनु तन को ताप न जाई ॥



तुम पिंजरा मैं सुवना तोरा ।

दरसन देहु भाग बड़ मोरा ॥

राम बिनु तन को ताप न जाई ॥



तुम सद्गुरु मैं प्रीतम चेला ।

कहै कबीर राम रमूं अकेला ॥

राम बिनु तन को ताप न जाई ॥

 कबीर- Kabir

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