रे मन माछला संसार समंदे, तू चित्र बिचित्र बिचारि रे - re man maachhala sansaar samande- रैदास- Raidas #www.poemgazalshayari.in ||Poem|Gazal|Shayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

रे मन माछला संसार समंदे, तू चित्र बिचित्र बिचारि रे।
जिहि गालै गिलियाँ ही मरियें, सो संग दूरि निवारि रे।। टेक।।
जम छैड़ि गणि डोरि छै कंकन, प्र त्रिया गालौ जांणि रे।
होइ रस लुबधि रमैं यू मूरिख, मन पछितावै न्यांणि रे।।१।।
पाप गिल्यौ छै धरम निबौली, तू देखि देखि फल चाखि रे।
पर त्रिया संग भलौ जे होवै, तौ राणां रांवण देखि रे।।२।।
कहै रैदास रतन फल कारणि, गोब्यंद का गुण गाइ रे।
काचौ कुंभ भर्यौ जल जैसैं, दिन दिन घटतौ जाइ रे।।३।।

- रैदास- Raidas

#www.poemgazalshayari.in

||Poem|Gazal|Shayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

Comments

Popular posts from this blog

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

गैस की कमी में खाना बनाने के 20+ स्मार्ट तरीके | Complete Guide for Smart Cooking Article Ambika Rahee

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) – पूरा प्रोसेस, ट्रेनिंग, टूल्स और फायदे