सचमुच मैं भी होता फकीर - sachamuch main bhee hota phakeer -- जयप्रकाश त्रिपाठी- Jayprakash Tripathi #www.poemgazalshayari.in ||Poem|Gazal|Shaayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

सचमुच मैं भी होता फकीर
तो हर दिन ऐसा क्यों होता !

घर आता-जाता क्यों हर दिन,
सामान जुटाता क्यों हर दिन,
कुछ खोता-पाता क्यों हर दिन,
करता, पछताता क्यों हर दिन,
अपना हर मोड़ स्वयं मुड़ता,
पँछी-सा खुला-खुला उड़ता,
सचमुच मैं भी होता फकीर...!

फिर क्यों इनसे-उनसे डरता,
क्षण-प्रतिक्षण क्यों तिल-तिल मरता,
करता जो भी, अच्छा करता,
हर आज़ादी का दम भरता,
सब जन-गण-मन अपना होता,
अन्धेरा नहीं घना होता,
सचमुच मैं भी होता फकीर....!

मन क्यों हँसता, मन क्यों रोता,
यश-अपयश होता, न होता
जैसी दिन की, वैसी रातें,
हर समय एक जैसी बातें,
जैसे अपना हर शहर-गाँव,
होता न कहीं कुछ भेद-भाव,
सचमुच मैं भी होता फकीर....!

क्षय की क्षय हो या जय की जय,
गतियों में लय या महाप्रलय,
मन निर्विकार, निर्लिप्त प्राण,
क्या त्राहिमाम्, क्या त्राण-त्राण,
करता अवनी का ओर-छोर,
मानो तृण-कण-कण को विभोर,
सचमुच मैं भी होता फकीर...!

चहुँओर रँग-सुर-जल-तरँग,
होती नद-सी अनहद उमँग,
नभ-सी निर्मल प्रत्येक दृष्टि,
हर लय में, गति में मधुर सृष्टि,
चर-अचर स्वयं निर्माता-सा
होता हर व्यक्ति विधाता-सा,
सचमुच मैं भी होता फकीर...!

क्या काल-देश, क्या राग-द्वेष,
क्या शेष और क्या-कुछ अशेष,
मानो समस्त में निलय-विलय,
सापेक्ष और निरपेक्ष समय,
प्राणी-प्राणी स्वयमेव लीन,
कोई न हीन, कोई मलीन,
सचमुच मैं भी होता फकीर....!

- जयप्रकाश त्रिपाठी- Jayprakash Tripathi

#www.poemgazalshayari.in

||Poem|Gazal|Shaayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||

Comments

Popular posts from this blog

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

गैस की कमी में खाना बनाने के 20+ स्मार्ट तरीके | Complete Guide for Smart Cooking Article Ambika Rahee

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) – पूरा प्रोसेस, ट्रेनिंग, टूल्स और फायदे