यह अंदेस सोच जिय मेरे - yah andes soch jiy mere -- रैदास- Raidas #www.poemgazalshayari.in ||Poem|Gazal|Shaayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||
यह अंदेस सोच जिय मेरे ।
निसिबासर गुन गाऊ~म तेरे ॥टेक॥
तुम चिंतित मेरी चिंतहु जाई ।
तुम चिंतामनि हौ एक नाई ॥१॥
भगत-हेत का का नहिं कीन्हा ।
हमरी बेर भए बलहीना ॥२॥
कह रैदास दास अपराधी ।
जेहि तुम द्रवौ सो भगति न साधी ॥३॥
- रैदास- Raidas
#www.poemgazalshayari.in
||Poem|Gazal|Shaayari|Hindi Kavita|Shayari|Love||
Comments
Post a Comment