पट चाहे तन, पेट चाहत छदन - pat chaahe tan, pet chaahat chhadan -

 पट चाहे तन, पेट चाहत छदन, मन

चाहत है धन, जेती संपदा सराहिबी।

तेरोई कहाय कै ’रहीम’ कहै दीनबंधु

आपनी बिपत्ति जाय काके द्वार काहिबी॥

पेट भर खायो चाहे, उद्यम बनायो चाहे,

कुटुंब जियायो चाहे काढ़ि गुन लाहिबी।

जीविका हमारी जो पै औरन के कर डारो,

ब्रज के बिहारी तौ तिहारी कहाँ साहिबी॥


Rahim- abdul rahim khan-i-khana

रहीम- अब्दुल रहिम खान-ए-ख़ाना



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