जानकी वल्लभ शास्त्री का जीवन परिचय | Acharya Janki Ballabh Shastri Biography Hindi
जानकी वल्लभ शास्त्री का जीवन परिचय | Acharya Janki Ballabh Shastri Biography Hindi
जानकी वल्लभ शास्त्री ( 5 फरवरी 1916 - 7 अप्रैल 2011) प्रसिद्ध कवि थे। जानकी वल्लभ शास्त्री उत्तर प्रदेश सरकार ने 'भारत भारती' पुरस्कार से सम्मानित भी किया है। उन्हें हिंदी कविता के पाठकों से बहुत मान-सम्मान मिला है। आचार्य का काव्य संसार बहुत ही विविध और व्यापक है। प्रारंभ में उन्होंने संस्कृत में कविताएँ लिखीं। फिर महाकवि निराला की प्रेरणा से हिंदी में आए।
जानकी वल्लभ शास्त्री का पहला गीत 'किसने बांसुरी बजाई' बहुत लोकप्रिय हुआ। प्रो. नलिन विमोचन शर्मा ने उन्हें प्रसाद, निराला, पंत और महादेवी के बाद पांचवां छायावादी कवि कहा है, लेकिन सचाई यह है कि वे भारतेंदु और श्रीधर पाठक द्वारा प्रवर्तित और विकसित उस स्वच्छंद धारा के अंतिम कवि थे, जो छायावादी अतिशय लाक्षणिकता और भावात्मक रहस्यात्मकता से मुक्त थी। शास्त्रीजी ने कहानियाँ, काव्य-नाटक, आत्मकथा, संस्मरण, उपन्यास और आलोचना भी लिखी है। उनका उपन्यास 'कालिदास' भी बृहत प्रसिद्ध हुआ था।
आपने सोलह-सत्रह की अवस्था में ही लिखना प्रारंभ किया था। इनकी प्रथम रचना गोविन्दगानम्' है जिसकी पदशय्या को कवि जयदेव से अबोध स्पर्द्धा की विपरिणति मानते हैं। ‘रूप-अरूप' और ‘तीन-तरंग' के गीतों के पश्चात् ‘कालन', ‘अपर्णा', ‘लीलाकमल' और ‘बांसों का झुरमुट'- चार कथा संग्रह कमशः प्रकाशित हुए। इनके द्वारा लिखित चार समीक्षात्मक ग्रंथ-'साहित्यदर्शन', ‘चिंताधारा,' ‘त्रयी' , और ‘प्राच्य साहित्य' हिन्दी में भावात्मक समीक्षा के सर्जनात्मक रूप के कारण समादृत हुआ।1945-50 तक इनके चार गीति काव्य प्रकाशित हुए-'शिप्रा', ‘अवन्तिका',' मेघगीत' और ‘संगम'। कथाकाव्य ‘गाथा' का प्रकाशन सामाजिक दृष्टिकोण से क्रांतिकारी है। इन्होंने एक महाकाव्य ‘राधा' की रचना की जो सन् 1971 में प्रकाशित हुई। 'हंस बलाका' गद्य महाकाव्य की इनकी रचना हिन्दी जगत् की एक अमूल्य निधि है। छायावादोत्तर काल में प्रकाशित पत्र-साहित्य में व्यक्तिगत पत्रों के स्वतंत्र संकलन के अंतर्गत शास्त्री द्वारा संपादित ‘निराला के पत्र' (1971) उल्लेखनीय है। इनकी प्रमुख कृतियां संस्कृत में- 'काकली', ‘बंदीमंदिरम', ‘लीलापद्मम्', हिन्दी में ‘रूप-अरूप', ‘कानन', ‘अपर्णा', ‘साहित्यदर्शन', ‘गाथा', ‘तीर-तरंग', ‘शिप्रा', ‘अवन्तिका', ‘मेघगीत', ‘चिंताधारा', ‘प्राच्यसाहित्य', ‘त्रयी', ‘पाषाणी', ‘तमसा', ‘एक किरण सौ झाइयां', ‘स्मृति के वातायन', ‘मन की बात', ‘हंस बलाका', ‘राधा' आदि हैं।
किसने बाँसुरी बजाई
जनम-जनम की पहचानी वह तान कहाँ से आई !
किसने बाँसुरी बजाई
अंग-अंग फूले कदंब साँस झकोरे झूले
सूखी आँखों में यमुना की लोल लहर लहराई !
किसने बाँसुरी बजाई
जटिल कर्म-पथ पर थर-थर काँप लगे रुकने पग
कूक सुना सोए-सोए हिय मे हूक जगाई !
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