कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' का जीवन परिचय | Biography of Kanhaiyalal Mishra Prabhakar
कन्हैया लाल मिश्र 'प्रभाकर' का जीवन परिचय | Biography of Kanhaiyalal Mishra Prabhakar
कन्हैयालाल मिश्र 'प्रभाकर' का जन्म 29 मई, 1906 को सहारनपुर ज़िले के देवबन्द गांव में हुआ था। कन्हैयालाल का मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था।
कन्हैयालाल मिश्र प्रभाकर हिन्दी के जाने-माने निबंधकार हैं जिन्होंने राजनैतिक और सामाजिक जीवन से संबंध रखने वाले अनेक निबंध लिखे हैं। इन्होंने पराधीनता के समय स्वाधीनता आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिसके कारण कई बार जेल भी जाना पड़ा।
आपका मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था। वे ज्ञानोदय के संपादक भी रहे।
कन्हैयालाल मिश्र का 9 मई 1995 को निधन हो गया।
प्रमुख साहित्यिक कृतियां -
जिंदगी मुसकाई, माटी हो गई सोना, दीप जले शंख बजे आदि।
नन्दा
नन्दा तीन दिन से भूखा था; पेट की ज्वाला से अधमरा!
'मैं अपना काम ठीक-ठाक करुंगा और उसका पूरा-पूरा फल पाऊंगा!' यह एक ने कहा।
एक हवेली के तीन हिस्सों में तीन परिवार रहते थे। एक तरफ कुन्दनलाल, बीच में रहमानी, दूसरी तरफ जसवन्त सिंह।
उस दिन रात में कोई बारह बजे रहमानी के मुन्ने पप्पू के पेट में जाने क्या हुआ कि वह दोहरा हो गया और जोर-जोर से रोने लगा। माँ ने बहलाया, बाप ने कन्धों लिया, आपा ने सहलाया, पर वह चुप न हुआ।
ग़नीमत हुई | बोध -कथा
राधारमण हिंदी के यशस्वी लेखक हैं। पत्रों में उनके लेख सम्मान पाते हैं और सम्मेलनों में उनकी रचनाओं पर चर्चा चलती है। रात उनके घर चोरी हो गई। न जाने चोर कब घुसा और उनका एक ट्रंक उठा ले गया - शायद जाग हो गई और उसे बीच में ही भागना पड़ा।
सेठजी | लघु-कथा
''महात्मा गान्धी आ रहे हैं, उनकी 'पर्स' के लिए कुछ आप भी दीजिये सेठजी!''
"बाबूजी, आपके पीछे हर समय खुफिया लगी रहती है, कोई हमारी रिपोर्ट कर देगा, इसलिए हम इस झगड़े में नही पड़ते!''
चंपू, गोकुल और वंशी एक महोत्सव में गये।
वहाँ तब तक कोई न आया था। वे आगे की कुर्सियों पर बैठ गये। दर्शन आते गये, बैत्रे गये, पंडाल भर गया।
उत्सव आरंभ हुआ। संयोजक ने सबका स्वागत किया।
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