गिरिजा कुमार माथुर का जीवन परिचय | Girija Kumar Mathur

 गिरिजा कुमार माथुर का जीवन परिचय  | Girija Kumar Mathur



गिरिजा कुमार माथुर का जन्म 22 अगस्त 1919  को गुना जिले के अशोक नगर , मध्य प्रदेश में हुआ। १९४३ में सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन " अज्ञेय" द्वारा सम्पादित और प्रकाशित " तारसप्तक " के सात कवियों में एक कवी आप भी है | 

आपके पिता " देवी चरण माथुर " एक अध्यापक थे, और एक अच्छे पिता थे जो आपको बचपन में ही घर पर हिंदी, इतिहास, अंग्रेजी, भूगोल पढाया करते है, आपके पिता को हिंदी साहित्य और संगीत से बहुत लगाव था, आपके पिता को कविता लिखने और सितार बजाने का बहुत सौक था |

आपकी माता "लक्ष्मी देवी " मालवा से थी और बहुत शिक्षित थी जो  आपके पढने में वो आपकी मद्दत किया करती थी | 


प्रारंभिक शिक्षा झाँसी, उत्तर प्रदेश में हुई और आपने लखनऊ विश्विद्यालय से एम.ए. अंग्रेज़ी व एल.एल.बी. की। कुछ समय तक वकालत की, उसके बाद आपने दूरदर्शन और  आकाशवाणी में भी काम किया।

१९९१ में आपको कविता संग्रह " मैं वक्त के सामने " के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा इसी कविता संग्रह से लिया १९९३ में आपको बिरला फाउंडेशन की तरफ से व्यास सम्मान दिया गया |


10 जनवरी 1994 को नई दिल्ली मे आपका निधन हो गया।


मुक्त ज्ञानकोष, वेब स्रोतों और उन सभी पाठ्य पुस्तकों का मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ, जहाँ से जानकारी प्राप्त कर इस लेख को लिखने में सहायता हुई है |

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