सआदत हसन मंटो का जीवन परिचय | Saadat Hasan Manto
सआदत हसन मंटो का जीवन परिचय | Saadat Hasan Manto
सआदत हसन मंटो का जन्म- 11 मई, 1912 को समराला, पंजाब में हुआ था। आप कहानीकार और लेखक थे। मंटो ने फ़िल्म और रेडियो पटकथा लेखन व पत्रकारिता भी की।
18 जनवरी, 1955 को लाहौर में इस कहानीकार और लेखक का निधन हो गया।
जूता
हजूम ने रुख़ बदला और सर गंगाराम के बुत पर पिल पड़ा। लाठियां बरसाई गईं। ईंटें और पत्थर फेंके गए। एक ने मुंह पर तारकोल मल दिया। दूसरे ने बहुत-से पुराने जूते जमा किए और उनका हार बनाकर बुत के गले में डालने के लिए आगे बढ़ा, मगर पुलिस आ गई और गोलियां चलना शुरू हुईं। जूतों का हार पहनाने वाला ज़ख़्मी हो गया। चुनांचे मरहम-पट्टी के लिए उसे सर गंगाराम अस्पताल भेज दिया गया।
लाइसेंस
अब्बू कोचवान बड़ा छैल छबीला था। उस का ताँगा घोड़ा भी शहर में नंबर वन था। कभी मामूली सवारी नहीं बिठाता था। उस के लगे-बंधे ग्राहक थे जिन से उस को रोज़ाना दस पंद्रह रुपये वसूल हो जाते थे, जो अब्बू के लिए काफ़ी थे। दूसरे कोचवानों की तरह नशा-पानी की उसे आदत नहीं थी। लेकिन साफ़-सुथरे कपड़े पहनने और हर वक़्त बाँका बने रहने का उसे बेहद शौक़ था।
करामात
लूटा हुआ माल बरामद करने के लिए पुलिस ने छापे मारने शुरू किए।
लोग डर के मारे लूटा हुआ माल रात के अँधेरे में बाहर फेंकने लगे, कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने अपना माल भी मौक़ा पाकर अपने से अलहदा कर दिया, ताकि क़ानूनी गिरफ़्त से बचे रहें।
टोबा टेकसिंह
बंटवारे के दो-तीन साल बाद पाकिस्तान और हिंदुस्तान की हुकूमतों को ख्याल आया कि अख्लाकी कैदियों की तरह पागलों का भी तबादला होना चाहिए, यानी जो मुसलमान पागल हिन्दुस्तान के पागलखानों में हैं उन्हें पाकिस्तान पहुंचा दिया जाय और जो हिन्दू और सिख पाकिस्तान के पागलखानों में है उन्हें हिन्दुस्तान के हवाले कर दिया जाय।
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