शिवमंगल सिंह सुमन का जीवन परिचय | Shivmangal Singh Suman
शिवमंगल सिंह सुमन का जीवन परिचय | Shivmangal Singh Suman
शिवमंगल सिंह सुमन का जन्म 05 अगस्त 1915, झगरपुर, उन्नाव, उत्तर प्रदेश में हुआ।
मुख्य कृतियां: हिल्लोल, मिट्टी की बारात, वाणी की व्यथा, प्रलय सृजन
सम्मान: साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारत भारती पुरस्कार
निधन: 27 नवम्बर 2002 को आपका निधन हो गया
हम पंछी उन्मुक्त गगन के
हम पंछी उन्मुक्त गगन के
पिंजरबद्ध न गा पाऍंगे
कनक-तीलियों से टकराकर
पुलकित पंख टूट जाऍंगे ।
हम बहता जल पीनेवाले
मर जाऍंगे भूखे-प्यासे
कहीं भली है कटुक निबोरी
कनक-कटोरी की मैदा से ।
मिट्टी की महिमा
निर्मम कुम्हार की थापी से
कितने रूपों में कुटी-पिटी,
हर बार बिखेरी गई, किन्तु
मिट्टी फिर भी तो नहीं मिटी।
आशा में निश्छल पल जाए, छलना में पड़ कर छल जाए,
सूरज दमके तो तप जाए, रजनी ठुमकी तो ढल जाए,
यों तो बच्चों की गुड़िया-सी, भोली मिट्टी की हस्ती क्या,
मैं सूने में मन बहलाता
मेरे उर में जो निहित व्यथा
कविता तो उसकी एक कथा
छंदों में रो-गाकर ही मैं, क्षण-भर को कुछ सुख पा जाता
मैं सूने में मन बहलाता।
मिटने का है अधिकार मुझे
है स्मृतियों से ही प्यार मुझे
उनके ही बल पर मैं अपने, खोए प्रीतम को पा जाता
चलना हमारा काम है
गति प्रबल पैरों में भरी
फिर क्यों रहूँ दर-दर खडा
जब आज मेरे सामने
है रास्ता इतना पड़ा
जब तक न मंज़िल पा सकूँ, तब तक मुझे न विराम है,
चलना हमारा काम है।
कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया
कुछ बोझ अपना बँट गया
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