विश्‍वंभरनाथ शर्मा कौशिक का जीवन परिचय | Vishwambharanath Sharma Kaushik Biography in Hindi

 विश्‍वंभरनाथ शर्मा कौशिक का जीवन परिचय | Vishwambharanath Sharma Kaushik Biography in Hindi


कथाकार विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक का जन्म अम्बाला छावनी में 1891 में हुआ। आप जब चार वर्ष के थे तब आपके दादाजी आपको कानपुर ले आए। आपने लगभग ३०० कहानियां लिखी हैं।


कथाकार विश्वम्भरनाथ शर्मा कौशिक की गणना प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद, गुलेरी के समकक्ष की जाती है। समस्त हिंदी कथा-साहित्य में अकेले 'कौशिक' जी ही ऐसे कथाकार हैं जो इस क्षेत्र में प्रेमचंद के अधिक निकट हैं। आधुनिक हिन्दी कहानी के विकास में आपका महत्वपूर्ण स्थान है व आप आधुनिक हिंदी कहानी निर्माताओं में से एक थे।


आपकी कहानी 'ताई' हिंदी की श्रेष्ठ कहानियों में से एक है। 'ताई' कहानी में नारी की मनोवृति का सफल चित्रण किया गया है।


आपकी कहानियाँ उस समय की प्रसिद्ध पत्रिकाओं जैसे 'सरस्वती', 'माधुरी' और 'सुधा' इत्यादि में प्रकाशित होती थीं।


कौशिक जी 'विजयानन्द दुबे' के नाम से 'दुबेजी की चिट्ठियाँ' व 'दुबे जी की डायरी' भी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लिखते रहे हैं। उनका हास्य-साहित्य अपने समय में मौलिक व बेजोड़ था।


1945 में 'कौशिक' जी का निधन हो गया।


मुख्य साहित्यिक कृतियाँ:


उपन्यास: माँ, भिखारिणी


कहानी संग्रह: खोटा बेटा, पेरिस की नर्तकी, साध की होली, चित्रशाला, मणिमाला, कल्लोल


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