मेरे युवा आम में नया बौर आया है | गिरिजाकुमार माथुर | Poemgazalshayari

मेरे युवा आम में नया बौर आया है | गिरिजाकुमार माथुर


 मेरे युवा-आम में नया बौर आया है

ख़ुशबू बहुत है क्योंकि तुमने लगाया है


आएगी फूल-हवा अलबेली मानिनी

छाएगी कसी-कसी अँबियों की चाँदनी

चमकीले, मँजे अंग चेहरा हँसता मयंक

खनकदार स्वर में तेज गमक-ताल फागुनी


मेरा जिस्म फिर से नया रूप धर आया है

ताज़गी बहुत है क्योंकि तुमने सजाया है।


अन्धी थी दुनिया या मिट्टी-भर अन्धकार

उम्र हो गई थी एक लगातार इन्तज़ार

जीना आसान हुआ तुमने जब दिया प्यार

हो गया उजेला-सा रोओं के आर-पार


एक दीप ने दूसरे को चमकाया है

रौशनी के लिए दीप तुमने जलाया है


कम न हुई, मरती रही केसर हर साँस से

हार गया वक़्त मन की सतरंगी आँच से

कामनाएँ जीतीं जरा-मरण-विनाश से

मिल गया हरेक सत्य प्यार की तलाश से


थोड़े ही में मैंने सब कुछ भर पाया है

तुम पर वसन्त क्योंकि वैसा ही छाया है


हमारे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए हम आपका आभार व्यक्त करते है | इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा Facebook, Whatsapp जैसे सोशल मिडिया पर जरूर शेयर करें | धन्यवाद  !!!


www.poemgazalshayari.in

Comments

Popular posts from this blog

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

गैस की कमी में खाना बनाने के 20+ स्मार्ट तरीके | Complete Guide for Smart Cooking Article Ambika Rahee

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana) – पूरा प्रोसेस, ट्रेनिंग, टूल्स और फायदे