कुछ पहले इन आँखों आगे क्या क्या न नज़ारा गुज़रे था | फ़ैज़ अहमज फ़ैज़ | Faiz Ahamad Faiz | फ़ैज़ अहमज फ़ैज़ shayari| Poemgazalshayari.in

फ़ैज़ अहमज फ़ैज़  | Faiz Ahamad Faiz | फ़ैज़ अहमज फ़ैज़ shayari| Poemgazalshayari.in

 

कुछ पहले इन आँखों आगे क्या क्या न नज़ारा गुज़रे था 

क्या रौशन हो जाती थी गली जब यार हमारा गुज़रे था 

थे कितने अच्छे लोग कि जिन को अपने ग़म से फ़ुर्सत थी 

सब पूछें थे अहवाल जो कोई दर्द का मारा गुज़रे था 


अब के ख़िज़ाँ ऐसी ठहरी वो सारे ज़माने भूल गए 

जब मौसम-ए-गुल हर फेरे में आ आ के दोबारा गुज़रे था 

थी यारों की बोहतात तो हम अग़्यार से भी बेज़ार न थे 

जब मिल बैठे तो दुश्मन का भी साथ गवारा गुज़रे था 


अब तो हाथ सुझाई न देवे लेकिन अब से पहले तो 

आँख उठते ही एक नज़र में आलम सारा गुज़रे था 


- फ़ैज़ अहमज फ़ैज़  | Faiz Ahamad Faiz | फ़ैज़ अहमज फ़ैज़ shayari| Poemgazalshayari.in


हमारे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए हम आपका आभार व्यक्त करते है | इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा Facebook, Whatsapp जैसे सोशल मिडिया पर जरूर शेयर करें | धन्यवाद  !!!


www.poemgazalshayari.in

Comments

Popular posts from this blog

बारिश क्यों होती है? आंधी क्यों आती है और ओले क्यों गिरते हैं?

Music Distribution क्या है? Music Distribution कैसे किया जाता है? Free और Paid Music Distribution Platforms की पूरी जानकारी

गैस की कमी में खाना बनाने के 20+ स्मार्ट तरीके | Complete Guide for Smart Cooking Article Ambika Rahee